*सूबे की उपराजधानी दुमका में धूमधाम से मनाया गया ईद उल फितर का त्योहार, एक दूसरे के गले मिलकर दी ईद की बधाई*
*दुमका*
*ब्यूरो रिपोर्ट*
सोमवार को जिला मुख्यालय दुमका समेत सभी प्रखंडों में ईद उल फितर का त्योहार धूमधाम से मनाया गया| शिकारीपाड़ा, दुमका, मसलिया, जामा, रामगढ़, काठीकुंड, गोपीकांदर, रानीश्वर, जरमुंडी व सरैयाहाट प्रखंड में लोगों ने एक-दूसरे के गले मिलकर ईद की बधाई देते हुए काफी उल्लास पूर्वक पर्व मनाया। सोमवार की सुबह शिकारीपाड़ा प्रखंड के कोल्हा बादर, सोनाढाब, बाकीजोर, सहरपुर, देवदहा, बेनागड़िया, पिनर गाड़िया, सरसडगाल, खाडूकदमा, ढाका व देवड़ीह के पवित्र ईदगाहों में ईद की नमाज अदा की गई| दुमका के सभी प्रखंडों में स्थित ईदगाहों पर लोगों ने ईद की नमाज अदा करने के पश्चात एक दूसरे के गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी|
एक महीने तक चले रमजान के बाद रविवार को चांद का दीदार हुआ| महीने भर रोजे रखने व तरावीह पढ़ने और अल्लाह की इबादत में मशगूल रहने की खुशी में मुस्लिम समुदाय के लोगो ने धूमधाम से ईद मनाई। मसलिया प्रखंड के पूर्व उप प्रमुख क़ादिर रजा ने जानकारी देते हुए बताया कि ईद मुसलमानों का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है।मुस्लिम समाज के लोग द्वारा तीस दिनों तक रोजा रखने के बाद ईद का चांद देखने के पश्चात ईदगाह में नमाज अदा की।
प्रखंड क्षेत्र के मुर्गीमोड,खुटोजोरी बाराकोला, खुटोजोरी, बाड़ाडुमरिया, गुमरो, जारगाडी, कुंजवोना, बेदियाचक,सुगापहाड़ी,सिद्पहाडी आदि गांवों सहित पूरे समाज के लोग मस्जिदों या ईदगाह में ईद की नमाज़ अदा की गई। एक-दूसरे को गले मिलकर “ईद मुबारक” दिया।रोजेदारों के लिए ईद अल्लाह की तरफ से मिलने वाला तोहफा माना जाता है। माह-ए-रमजान मुकम्मल होने की खुशी में मुसलमान समाज हर साल ईद मनाते हैं। रविवार शाम को ईद का चांद नजर नजर आने के बाद ईद की नमाज पूरे गांव व समाज के लोग एक साथ ईदगाह में नमाज अदा किया और एक दूसरे से गले मिलकर मुबारकबाद देते हुए मुल्क के अमन शांति और मोहब्बत का पैगाम दिए।
ईद मनाने को लेकर मान्यता
है कि 14 सौ साल पूर्व मक्का से मोहम्मद पैगंबर के प्रवास के बाद पवित्र शहर मदीना में ईद-उल-फितर का उत्सव शुरू हुआ। इस दिन पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब ने बद्र की लड़ाई में फ़तेह हासिल किया था। जिसकी खुशी में सबका मुंह मीठा करवाया गया था, इसी दिन को मीठी ईद या ईद-उल-फितर के रुप से मनाने की परंपरा चली आ रही है, जो हर साल मुस्लिम समाज के लोग बड़ी इबादत के साथ मानते है।
