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मयूरनाथ गांव में भब्य कलश शोभायात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ* 

*मयूरनाथ गांव में भब्य कलश शोभायात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ*

 

*भागवत कथा के श्रवण मात्र से प्राणी संसार के सभी सुखों को भोगकर अन्त में बिष्णु लोक को जाता है – मां ध्यान मूर्ति जी*

 

*रामगढ़(दुमका)*

 

*रिपोर्ट – बजरंग अग्रवाल*

 

रामगढ़ प्रखंड के पथरिया पंचायत अंतर्गत मयूर नाथ गांव में सोमवार को भब्य कलश शोभायात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कलश यात्रा को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। सभी श्रद्धालु राधे राधे के गगनभेदी नारे लगा रहे थे। गाजे- बाजे के साथ करीब 1100 महिलाओं सहित कन्याओं ने करीब छः किलोमीटर तक पैदल चलकर शोभायात्रा निकाली। खुली गाड़ी पर सवार कथा वाचक परम पूज्य मां ध्यान मुर्ति जी महाराज भी संपूर्ण कलश यात्रा में शामिल रही। कलश यात्रा में शामिल लोगों के लिए ग्रामीणों के द्वारा जगह जगह पर शर्बत एवं पेयजल की व्यवस्था की गई थी।

श्रद्धालुओं ने अपने घर से बाहर निकलकर कलश यात्रा में शामिल लोगों की खूब सेवा की। कलशयात्रा कथा पंडाल से निकल कर रामगढ़ बाजार होते हुए सारमी के शिव गंगा स्थित तालाब पहुंची, जहां वृन्दावन धाम से आए विद्वान पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलश में जल भरवाया। वहां से शोभायात्रा सारमी, ब्लाक, रामगढ़ बाजार, जोगिया होते हुए कथा पंडाल पहुची। जहां विधि विधान से कलश स्थापित कराया गया।

पहले दिन की कथा के दौरान श्री धाम वृंदावन से आई अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथा वाचक मां ध्यानामूर्ति जी ने भागवत कथा की शुरुआत दीप प्रज्वलन, भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थना से की। महाराज जी ने भागवत प्रसंग की शुरुआत भागवत के प्रथम श्लोक से की। सच्चिदानंद रुपाय विश्र्वोत्पात्यादि हेतवे ताप त्रय विनाशाय: श्रीकृष्णाय वयम नम:।।

महाराज जी ने कहा कि भागवत के प्रथम श्लोक में भगवान को प्रणाम किया गया है। उनके स्वभाव का वर्णन किया गया है। उनकी लीलाओं का वर्णन किया गया है। भागवत को समझना भगवान को समझने के बराबर है। इसके श्रवण मात्र से प्राणी संसार के सभी सुखों को भोगकर अन्त में बिष्णुलोक को जाता है। कथा के दौरान एक से बढ़कर एक भक्ति गीत पर देर रात तक श्रद्धालु ओतप्रोत दिखाई दिए।

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