*श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन मानव सृष्टि की रचना,शिव-सती संवाद एवं ध्रुव चरित्र का वर्णन*
*जीवन में खुशियां प्राप्त करने के लिए बच्चों को संस्कारवान बनाएं, बचपन में लगी लत जल्दी मिटती नहीं – कथावाचक*
*रामगढ़(दुमका)*
प्रखंड के सारमी गांव स्थित शिव मंदिर प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भगवान ब्रहमा जी के द्वारा मानव सृष्टि की रचना, शिव, सती संवाद ध्रुव चरित्र का वर्णन किया गया| कथा वाचक परम पूज्य स्वामी गोपाल भाई ओझा ने ध्रुव चरित्र का मनोहारी वर्णन करते हुए कहा कि ध्रुव ने माता के गर्भ में ही नारायण नाम का मंत्र सुन लिया था| जब उनका जन्म हुआ तो उन्होंने इसी नारायण नाम के मंत्र से सर्वोच्च पद को प्राप्त किया और उन्होंने करोड़ों वर्ष तक का राज किया| हमारे देश के बच्चों को संस्कार का ज्ञान देना बहुत जरूरी है| इसका प्रत्यक्ष प्रमाण ध्रुव है। मात्र 5 वर्ष की आयु में उन्होंने जो काम किया वह उनके संस्कार का हीं परिणाम था| बच्चों में ऐसे संस्कार डालने चाहिए और इसकी शुरुआत बाल्य काल में ही करनी चाहिए| क्योंकि बाल्यकाल का संस्कार जीवन भर चलता है। जीवन प्रयत्न रहता है।
बालक अपने मां-बाप की सेवा करें समाज में प्रेम से सद्भावना के साथ रह सके परिवार और समाज की एकता को आज बनाने की आवश्यकता है। हम बड़ी बड़ी बात ना कर छोटे-छोटे सुधार कर जीवन में खुशियां प्राप्त करने के लिए बच्चों को संस्कारवान बनाएं। बचपन में लगी लत जल्दी मिटती नहीं है इसलिए एक बार बचपन में प्रभु नाम का रस मिल जाए तो जीवन भर उसे नाम का रस मिलता रहता है| इसलिए हर बच्चे को इस कलयुग में प्रभु नाम का सहारा लेना चाहिए| क्योंकि कलयुग केवल नाम अधारा कलयुग की सबसे बड़ी विशेषता है कि इस युग में प्रभु का नाम जपना ही मुक्ति का मार्ग तय करता है।
हर किसी को इस नाम का सहारा लेना पड़ता है| हर मानव धन के पीछे भाग रहे है, ऐसा नहीं है कि कलयुग इस युग में है हर युग में कलयुग रहा है पर कलयुग में कलयुग का प्रभाव बढ़ रहा है और इस कलयुगी प्रभाव को रोकने का एकमात्र उपाय है प्रभु नाम का सहारा लेना हमारे सनातन धर्म में शास्त्रों में ऐसे कई प्रमाण मिलते हैं जहां बचपन में ही संस्कारवान बनाया गया और उन्होंने कई कृतियां स्थापित की। इस दौरान भगवती भद्र काली की झांकी के साथ ही अत्यंत मनोरम झांकियां प्रस्तुत की गई।
