*लोवापाड़ा एवं सलबोना मौजा में तय नियमों को ताक पर रखकर दे दी गई पत्थर खदानों की स्वीकृति*
*पत्थर खदान में विस्फोटक के इस्तेमाल से पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा निर्माणाधीन बृहत पानी टंकी को हो सकती है क्षति*
*लीज एरिया से एक किलोमीटर के भीतर हो रहा है पानी टंकी का निर्माण, लीज एरिया से एक किमी से भी कम है गांव की दूरी*
*विभाग ने उपायुक्त को पत्र लिख जतायी चिंता, डीडी के आदेश पर डीएमओ ने किया पत्थर खदानों का निरीक्षण*
*शिकारीपाड़ा(दुमका)*
*रिपोर्ट – सियाराम शरण सिंह*
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग दुमका वन के तहत शिकारीपाड़ा प्रखंड के लोवापाड़ा एवं सलबोना मौजा में बहुउद्देशीय ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजना डी डब्लूएस के तहत निर्माणाधीन बृहत पानी टंकी को पत्थर खदान में किए जा रहे विस्फोट से होने वाली क्षति की अशंका को लेकर विभागीय अभियंता द्वारा जारी पत्र के आलोक में वर्तमान उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने कड़ा कदम उठाते हुए जिला खनन पदाधिकारी को जांच करते हुए अग्रेतार कार्रवाई का आदेश दिया है। मिली जानकारी के अनुसार उपायुक्त के निर्देश का पालन करते हुए जिला खनन पदाधिकारी दुमका प्रभावित ने पत्थर खदानों का निरीक्षण किया है, जिससे लोवा पाड़ा एवं सालबोना मौजा में संचालित पत्थर खदानों के मालिकों में हड़कंप मच गया है।
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अभियंता द्वारा उपयुक्त को पत्र लिखकर उक्त दोनों मौजा में संचालित खदानों पर अविलंब रोक लगाने की मांग की गई है, क्योंकि उक्त दोनों मौजा में पेयजल आपूर्ति के लिए बृहद टंकी का निर्माण कार्य प्रगति पर है| यदि इस क्षेत्र में पत्थर खनन करने के लिए विस्फोटक का प्रयोग किया जाएगा तो पेयजल आपूर्ति योजना पर गंभीर असर पड़ेगा तथा योजना असफल हो सकती है।
हालांकि इस संबंध में जानकारी के लिए जिला खनन पदाधिकारी आनंद कुमार से काफी प्रयास के बावजूद संपर्क स्थापित नहीं हो सका| मोबाइल की घंटी बजती रही श्रीमान ने फोन उठाना उचित नहीं समझा| ज्ञात हो कि उक्त दोनों गांव आदिम जनजाति बाहुल्य गांव है तथा सर्वाधिक पत्थर खदानों की स्वीकृति इन्हीं दो मौजा में हुई है| आगे देखना है कि प्रशासन द्वारा इस पर किस प्रकार का कदम उठाए जा रहा है| क्योंकि आए दिन पत्थर खनन के लिए पत्थर खदान मालिकों द्वारा निर्धारित क्षमता से अधिक क्षमता वाले विस्फोटकों का प्रयोग किया जाता है। सारे नियमों को दरकिनार करते हुए गांव के नजदीक पत्थर खदान के लिए खनन पट्टा स्वीकृत करना भी अपने आप में प्रश्न खड़ा कर रहा है। पश्चिम बंगाल के कुछ ऐसे भी पत्थर खदान मालिक पत्थर खनन में संलिप्त है जिनके भय के कारण आम ग्रामीण मुंह बंद किए हुए हैं| वह दिन दूर नहीं जब उक्त दोनों गांव के आदिम जनजाति के ग्रामीणों को अपने गांव को छोड़कर कहीं अन्यत्र जाकर बसेरा लेने के लिए विवश होना पड़ेगा।
