*बन्दोबस्त कार्यालय, दुमका में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितता के खिलाफ विधि लिपिक संघ का एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन व अनशन*
*सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी महेंद्र मांझी ने अपने उपर लगाएं गए आरोपों को बताया तथ्यहीन व बेबुनियाद*
*दुमका*
*ब्यूरो रिपोर्ट*
विधि लिपिक संघ की ओर से शुक्रवार को बन्दोवस्त कार्यालय संताल परगना, दुमका में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितता के खिलाफ एक दिवसीय धरना प्रदर्शन व अनशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया| कार्यक्रम के पश्चात आयुक्त, उपायुक्त एवं बंदोबस्त पदाधिकारी के माध्यम से विधि लिपिक संघ की ओर से राज्य सरकार के नाम मांगपत्र भेजा गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ के संरक्षक रविन्द्र चंद्र यादव ने की। कार्यक्रम का संचालन महासचिव कंचन यादव ने किया। कार्यक्रम में विधि लिपिक संघ के पदाधिकारी और सदस्यगण मौजूद रहे। मौके पर कई अधिवक्ता और ग्राम प्रधान मांझी संगठन के भी लोगों ने उपस्थित होकर आंदोलन का समर्थन किया।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि बंदोबस्त कार्यालय संताल परगना, दुमका में पदस्थापित अधिकारियों व कर्मचारियो के लापरवाही के कारण समय पर कोई काम नहीं होता। नकल के लिए रैयतों को वर्षों तक कार्यालय का चक्कर काटना पड़ता है| अभिलेखागार के कर्मी नकलखाना को जल्दी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराते हैं| हर नकल आवेदन के पीछे मोटी रकम की मांग करते है। अभिलेख किसी भी तरह नकल खाना में चले जाने के बाद नकल खाना वाले भी अपने लिए एवं सहायक बन्दोवस्त पदाधिकरी, मुख्यालय के हिस्से के लिए भी मोटी रकम की माँग करते है। जिस नकल आवेदन में रूपये का चढ़ावा मिल जाता है, उसका नकल तुरन्त उपलब्ध हो जाता है। जिस नकल आवेदन में रूपया नहीं मिलता हैं उसे रद्दी की टोकरी में फेंक दिया जाता है। अगर आज देखा जाय तो हजारों नकल आवेदन यों ही पेंडिंग रखे हुऊ है, जिसका कोई माँ-बाप नहीं है और न ही कोई इसको देखने वाला है। बहुत सारे अभिलेखों में आदेश पारित है परन्तु आदेश के पालन में तरमिम कार्य इन लोगों के द्वारा बिना रूपया लिए नहीं किया जाता हैं|
तरमिम कार्य में भी अभिलेखागार के द्वारा सहायक बन्दोवस्त पदाधिकारी, मुख्यालय के हिस्से के लिए भी मोटी रकम की माँग की जाती है, नहीं देने पर तरमिम कार्य नहीं किया जाता हैं। आज भी देखा जाय तो सैकड़ों से उपर तरमिम आवेदन इनके कार्यालय में धूल फॉक रहे है। इन सब मामलों की जानकारी सहायक बन्दोवस्त पदाधिकारी मुख्यालय को है। फिर भी उनके द्वारा कोई आवश्यक कार्रवाई नहीं की जाती है| और तो और सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी महेंद्र मांझी दर्जनों शिविर के प्रभार में रहकर मलाई खा रहे हैं, क्या मजाल कि बिना रूपया लिए किसी अभिलेख में आदेश पारित कर दें| हर हाल में, हर काम के लिए इनके द्वारा खुलेआम अवैध राशि की उगाही की जाती है। इन्हें रोकने टोकने वाला कोई जन्म नहीं लिया है।
उन्होंने कहा कि सहायक बन्दोवस्त पदाधिकारी, मुख्यालय दर्जनों शिविर के प्रभार में रहने के कारण मुख्यालय में बहुत कम ही नजर आते हैं, हर दिन इनका कैम्प कोर्ट में ही समय बीतता है| जब भी किसी काम के लिए जाओं यह महाशय अपने कुर्शी से नदारद पाये जाते है| हर दिन की यही इनकी दिनचर्या है। दूर दूर से कार्यालय पहुंचे रैयत इनकी प्रतीक्षा में सारा दिन गुजार कर वापस चले जाते है।
सरकार का यह निर्देश पत्र भी है कि अगर कोई सहायक बन्दोवस्त पदाधिकारी, मुख्यालय है तो उसे न्यायहित एवं लोकहित में कैम्प न्यायालय का कार्य आवंटित नहीं होगा। परन्तु पैरवी और पैसे के दम पर दर्जनों स्थान पर प्रभार में बने हुए है, इनके लिए कोई नियम कानून मायने नहीं रखता| परिणाम स्वरूप मुख्यालय के कार्य पर गम्भीर असर पड़ता है| दर्जनो जगह दौड़ने के चक्कर में सारा कार्य अधूरा ही होता है। सहायक बन्दोवस्त पदाधिकारी, मुख्यालय गोड्डा जिले के प्रभार में हैं जबकि उनका घर भी गोड्डा जिला में ही पड़ता है। उनका एक सारथी कर्मी है, उनका भी घर गोड्डा जिला में ही पड़ता है। नियमानुसार इन दोनों की पोस्टिंग अपने गृह जिला में नही होनी चाहिए। परन्तु नियमों का मखौल उड़ाया जा रहा है। अभिलेख पत्र पर आदेश पत्र भी अनुसेवक लिखता है, इससे रैयतों को किस प्रकार का न्याय मिलता होगा उसका ईश्वर ही मालिक है।
सहायक बन्दोवस्त महेन्द्र माँझी के अतिरिक्त भी कई सहायक बन्दोवस्त पदाधिकारी कार्यरत हैं, परन्तु सारा कार्य महेंद्र मांझी के ही इसारे पर होता है और अन्य सहायक बन्दोबस्त पदाधिकारी सिर्फ बैठ कर वेतन लेते हैं। पिछले दिनों भारी संख्या में विभाग द्वारा कर्मचारियों का स्थानांतरण एवं पदस्थापन किया गया परन्तु अभी तक कुछ पेशकार न्यायालय का अभिलेख गैर-कानूनी रूप से रखे हुए है। जो जांच का विषय है।
राज्य सरकार को भेजे गए मांगपत्र में सरकार से मांग की गई है कि
सहायक बन्दोवस्त पदाधिकारी महेंद्र मांझी को सभी शिविरों के प्रभार से हटाकर मुख्यालय में रखा जाय। ताकि रैयतों एवं हम मोहरिलों का कार्य आसानी से हो सके।
किरानी हाँसदा, अनुसवेक को उनके गृह जिला गोड्डा शिविर से हटाकर अन्यत्र शिविरों रानेश्वर, शिकारीपाड़ा, काठीकुण्ड आदि में भेजा जाए। अथवा वाह्य श्रोत की सेवा से हटाया जाय।
स्थानांतरित पेशकार से अभिलेखा जमा कराया जाय, तथा इन सभी के ऊपर विभागी कार्रवाई के लिए सरकार को लिखा जाए।
नकल निर्गत करने एवं तरमिम करने संबंधी व्यवस्था को सरल आसान बनाया जाय।
पूर्व बंदोबस्त पदाधिकारी सुनील कुमार एवं वर्तमान सहायक बन्दोवस्त पदाधिकारी महेन्द्र माँझी द्वारा किये गए कार्यों की जाँच की जाय ।
गोड्डा एवं साहेबगंज जिला के सभी शिविर से तत्काल सभी कर्मचारी को स्थानांतरित कर मुख्यालय लाया जाय और इनके विरूद्ध विभागीय कार्यवाही की जाय।
उन्होंने बताया कि मांगपत्र आयुक्त संताल परगना प्रमंडल, उपायुक्त दुमका और बन्दोवस्त पदाधिकारी दुमका को सौपा गया।
कार्यक्रम में अध्यक्ष जय चांद मंडल, सम्मानित अध्यक्ष शुभेन्द्र प्रसाद सिन्हा, धीरेंद्र महतो, संजीव यादव, मृदुल गुप्ता, हाबु महतो, नंद चौधरी, कोषाध्यक्ष नरेंद्र नाथ दुबे, गणेश मिश्रा, तापस मंडल, हराधन मांझी, पप्पू ठाकुर, सुमित कुमार झा, बिजय हेम्ब्रम, गुडविल टुडू, दीपक झा, बीरेंद्र गुप्ता, भक्तिपद दास, बालेश्वर सिंह, परमेश्वर सिंह सहित दर्जनों विधि लिपिक मौजूद थे।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सलाहकार सह अधिवक्ता कमल किशोर झा, अधिवक्ता डॉ अमरेन्द्र कुमार यादव, ग्राम प्रधान मांझी संगठन के अध्यक्ष सह अधिवक्ता भीम मंडल, दिलीप कुमार तिवारी, केएन झा, विकास कुमार चौरसिया मुख्य रूप से मौजूद थे।
मामले में सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी महेंद्र मांझी ने अपने उपर लगाएं गए आरोपों को तथ्यहीन व बेबुनियाद बताते हुए कहा कि बंदोबस्त कार्यालय संताल परगना दुमका में कुल 388 पद सृजित है परन्तु फिलहाल सिर्फ 41 पदों पर अधिकारी व कर्मचारी पदस्थापित है| इन्हीं 41 लोगों से परे संताल परगना का कार्य लेना है| फिलहाल संताल परगना में कुल 29 शिविर संचालित है| 41 लोगों में आठ नौ लोग चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी हैं|
पूरे संताल परगना का कार्य मात्र तीस बत्तीस लोगों द्वारा किया जा रहा है| उन्होंने बताया कि मामले से विभाग को अवगत कराया गया है| फिलहाल बंदोबस्त से संबंधित सभी कार्य सुचारू रूप से किए जा रहे हैं लेकिन कर्मियों की कमी के कारण कुछ विलंब अवश्य हो रहा है| उन्होंने कहा कि उनपर इस तरह का बेबुनियाद आरोप लगाकर उनकी छवि को धूमिल करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है| कहा कि मुझपर गलत कार्य करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है जल्द ही वे कानूनी प्रक्रिया से इसका जबाब देंगे|
