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पश्चिमी मसलिया में लकड़ी माफियाओं का वर्चस्व, दिन के उजाले में खुलेआम कर रहे हरे-भरे पेड़ों की कटाई* 

*पश्चिमी मसलिया में लकड़ी माफियाओं का वर्चस्व, दिन के उजाले में खुलेआम कर रहे हरे-भरे पेड़ों की कटाई*

 

*बेखौफ लकड़ी माफिया जंगलों के साथ घनी आबादी में चला रहे कुल्हाड़ी, वन विभाग व प्रशासन मौन*

 

*मसलिया(दुमका)*

 

*रिपोर्ट – कुमार विक्रम*

 

वन विभाग की उदासीनता से पश्चिमी मसलिया में लकड़ी माफियाओं का वर्चस्व कायम हो गया है| लकड़ी माफिया जब चाहे हरे-भरे पेड़ों की कटाई कर तस्करी कर रहे हैं| जंगलों से पेड़ की कटाई होने से एक तरफ पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है तो दूसरी तरफ लकड़ी माफिया मालामाल हो रहे हैं है। इस क्षेत्र में लकड़ी माफियाओं का मनोबल इतना बढ़ गया है कि वे खुलेआम दिनदहाड़े पेड़ों की अवैध कटाई कर आराम से पश्चिम बंगाल ले जा रहे है| मामले में विभाग पूरी तरह मौन साधे बैठा है। गुमरो, खुटोजोरी, मसानजोर, बास्कीडीह, धोबना, हरिन बहाल और कुंजबोना जैसे इलाकों में इन माफियाओं की सक्रियता से जंगलों और पर्यावरण को बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

 

लकड़ी के लालच में अब ये माफिया न केवल जंगलों को निशाना बना रहे हैं, बल्कि आबादी वाले क्षेत्रों में भी हाथ साफ कर रहे हैं। गुमरो पंचायत की बात करें तो परवाद टोला के बजरंगबली मंदिर के पास स्थित एक विशाल बरगद के पेड़ को दिनदहाड़े काटने की कोशिश की गई। खबर कवरेज के दौरान देखा गया कि फिलहाल इसकी केवल मोटी टहनियों को ही काटा गया है, लेकिन यह इस बात का साफ संकेत है कि पूरी योजना पेड़ को जड़ से गिराने की थी। इसी प्रकार शीतपहाड़ी मैदान में भी एक और विशाल बरगद पेड़ को निशाना बनाया गया। यह क्षेत्र सार्वजनिक उपयोग और जैव विविधता के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन माफिया गिरोह बेखौफ होकर पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे इस पर आपत्ति दर्ज कर चुके हैं, लेकिन न तो वन विभाग सक्रिय हुआ है और न ही प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई की है।

 

यह सवाल उठता है कि जब गांवों के बीचोंबीच, मंदिरों के पास और मैदानों में भी पेड़ों की कटाई हो रही है,तो विभाग व प्रशासन क्या कर रहा हैं?

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