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देश भर में आज भी मशहूर है लालू यादव की कुर्ता फाड़ होली, देहाती अंदाज में आते थे नजर, जानें इसकी खासियत* 

*देश भर में आज भी मशहूर है लालू यादव की कुर्ता फाड़ होली, देहाती अंदाज में आते थे नजर, जानें इसकी खासियत*

 

*पटना*

 

*ब्यूरो रिपोर्ट*

 

देशभर में आज 14 मार्च को होली मनाई जा रही है। जब भी किसी राजनेता के आवास की होली की चर्चा की जाती है तो बिहार में लालू प्रसाद यादव की कुर्ता फाड़ होली का भी जिक्र होता है। लालू यादव की कुर्ता फाड़ होली बिहार की सियासी और सामाजिक संस्कृति का एक अनोखा हिस्सा रही है। पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव ने अपने खास अंदाज में कुर्ता फाड़ होली को एक अलग पहचान दी है, जिसे लोग आज भी याद करते है।

 

लालू प्रसाद यादव ने 1990 के दशक में खासकर अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल 1990 से 1997 के दौरान कुर्ता फाड़ होली की परंपरा को काफी लोकप्रिय बना दिया था। जब वे सत्ता में थे तो पटना में उनके सरकारी आवास पर होली का एक बड़ा आयोजन किया जाता था।

सुबह सात बजे से लोग जुटने लगते थे| लालू याद की कुर्ता फाड़ होली के लिए सुबह सात बजे से ही लोग उनके आवास पर पहुंचने लगते थे। फाग के बीच रंग का दौर चलता था। इस दौरान वे अपने समर्थकों, कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ ढोल-मंजीरा लेकर बैठते थे और फाग गीत गाते थे।

 

*दोपहर तक कुर्ता फाड़ होली की होती थी शुरुआत*

 

वहीं लालू के आवास पर दोपहर होते-होते होली कार्यक्रम कुर्ता फाड़ होली में तब्दील हो जाता था। जिसमें वहां मौजूद सभी लोग एक-दूसरे के कुर्ते फाड़ते थे। यहां तक कि लालू प्रसाद यादव का भी कुर्ता नहीं बचता था। लोग लालू प्रसाद यादव का भी कुर्ता फाड़ देते थे।

 

*लालू खुद बजाते थे ढोल*

 

लालू प्रसाद यादव के आवास पर कुर्ता फाड़ होली नेता और कार्यकर्ताओं के बीच की औपचारिक दूरी को मिटाने का प्रतीक थी। शाम को अबीर-गुलाल और होली गायन का कार्यक्रम होता था। होली के गीतों के बीच लालू प्रसाद यादव खुद ढोल बजाते थे।

लालू प्रसाद यादव की कुर्ता फाड़ होली इसलिए भी खास थी क्योंकि इस दिन उनके आवास पर तमान नेता और कार्यकर्ता इकट्ठा होते थे। इस दिन सीएम के रोल से निकलकर लालू फुल देहाती अंदाज में नजर आते थे। फिर जोगीरा सा…रा…रा…के बोल से पूरा इलाका गूंज उठता था।

 

*राबड़ी भी साथ खेलती थीं होली*

 

लालू प्रसाद के आवास पर कुर्ता फाड़ होली की सबसे खास बात यह थी कि होली में गोबर और कीचड़ से सने लोग तरह-तरह के रंगो से सराबोर रहते थे। लालू कुर्ता फाड़ होली खेलते थे वहीं सामने खड़ी राबड़ी देवी उनके ऊपर रंग डालती थीं। राबड़ी देवी भी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ जमकर होली खेलती थीं।

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