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दिशोम गुरु शिबू सोरेन और उनके परिवार को एक नई पहचान देने वाले जामा विस क्षेत्र से अबतक किसी भी विधायक को नहीं बनाया गया मंत्री* 

*दिशोम गुरु शिबू सोरेन और उनके परिवार को एक नई पहचान देने वाले जामा विस क्षेत्र से अबतक किसी भी विधायक को नहीं बनाया गया मंत्री*

 

*1980 से 2024 के बीच सिर्फ 2005 को छोड़कर इस सीट पर अपराजेय रही है झारखंड मुक्ति मोर्चा*

 

*रामगढ़(दुमका)*

 

*रामगढ़ ब्यूरो की रिपोर्ट*

 

झारखंड मुक्ति मोर्चा का गढ़ माने जाने वाले जामा विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल करने वाले किसी भी विधायक को अबतक मंत्री बनने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ। यहां की जनता ने सिर्फ सोरेन परिवार ही नहीं बल्कि पार्टी ने जिसे टिकट दिया उसे अपना किमती मत देकर विधानसभा पहुंचाने का काम किया।

1980 से 2024 तक 6 बार शिबू सोरेन या फिर उनके पारिवार के सदस्य हीं विधायक बनें| जबकि 3 बार सोरेन परिवार के बाहर पार्टी ने जिसे टिकट दिया उसकी जीत हुई। 1980 से 2024 के बीच सिर्फ 2005 में ही यहां झारखंड मुक्ति मोर्चा को पराजय का सामना करना पड़ा था। जामा विधान सभा एक ऐसी सीट है जिसने शिबू सोरेन और उनके परिवार को एक नई पहचान दी। 1985 में पहली बार शिबू सोरेन इसी सीट से जीत कर विधानसभा पहुंचे थे|

2 बार दुर्गा सोरेन और 3 बार सीता सोरेन ने यहां का प्रतिनिधित्व किया। अलग झारखंड राज्य बनने के बाद कई बार दिसोम गुरु शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन चौंथी बार झारखंड के सीएम बने। वर्ष 2019 में गठबंधन की सरकार हेमंत सोरेन के नेतृत्व में बनी। संकट के बाबजूद सरकार ने अपना कार्यकाल पूरा किया। 2024 के चुनाव में इंडी गठबंधन को प्रचंड बहुमत मिला। अब एक बार फिर हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार बनी।

इसके बाबजूद आज तक जामा के किसी भी विधायक को मंत्री बनने का सौभाग्य नहीं मिला। वजह चाहे जो भी हो लेकिन इन दिनों इस तरह की चर्चा चौक चौराहे पर जरूर हो रही है।

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