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उपायुक्त के सख्त निर्देश के बावजूद मसलिया व टोंगरा थाना क्षेत्र में नहीं थम रहा बालू का अवैध कारोबार* 

*उपायुक्त के सख्त निर्देश के बावजूद मसलिया व टोंगरा थाना क्षेत्र में नहीं थम रहा बालू का अवैध कारोबार*

 

*प्रशासनिक चुप्पी से बालू माफियाओं का हौसला बुलंद, विभिन्न नदी घाटों से बालू का उठाव निरंतर जारी*

 

*मसलिया(दुमका)*

 

*कुमार विक्रम की रिपोर्ट*

 

मसलिया और टोंगरा थाना क्षेत्र में बालू का अवैध खनन व परिवहन बेखौफ जारी है। उपायुक्त ए. दोड्डे के सख्त निर्देशों के बावजूद प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता से बालू माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। प्रखंड स्तरीय खनन टास्क फोर्स की निष्क्रियता ने इन माफियाओं के लिए सुनहरा अवसर पैदा कर दिया है, जिससे हर दिन सैकड़ों ट्रैक्टरों से अवैध रूप से बालू का उठाव किया जा रहा है।

 

*प्रशासनिक सुस्ती से माफियाओं को खुली छूट*

 

सूत्रों के अनुसार नूनविल नदी के फूलशहरी, कुसुमघाटा, गुड़मला, आस्ताजोड़ा, दुखियाडीह, भांगाहीड, दिनारी नदी घाट और शिला नदी तथा मयूराक्षी नदी के बांसजोड़ा व पश्चिम मसलिया के घाटों से प्रतिदिन भारी मात्रा में बालू का अवैध खनन हो रहा है। इस अनियमित खनन से न केवल सरकारी राजस्व को करोड़ों का नुकसान हो रहा है, बल्कि नदी का बहाव प्रभावित होने, जलस्तर घटने और कटाव बढ़ने जैसी गंभीर पर्यावरणीय समस्याएं भी सामने आ रही हैं।

 

*मुख्य मार्गों पर दौड़ रहे अवैध बालू लदे ट्रैक्टर*

 

अवैध खनन का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दलाही-रानिबहाल, दलाही-आश्रम मोड़, दुमका-दलाही और शीतपहाड़ी-मसानजोर मार्ग पर बालू लदे ट्रैक्टर दिन-दहाड़े सरपट दौड़ते देखे जा सकते हैं। लेकिन इसके बावजूद पुलिस और प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।

 

*पत्रकारों पर दबाव बनाने की कोशिश*

 

बालू माफिया के इस खेल को उजागर करने वाले पत्रकारों पर भी दबाव बनाया जा रहा है। कई पत्रकारों को धमकाने और कानूनी पचड़ों में फंसाने की कोशिशें की गई हैं। झारखंड में अवैध खनन से जुड़े कई मामलों में पत्रकारों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इस अवैध धंधे में भ्रष्टाचार का खुला खेल जारी है।

 

*क्या होगी कार्रवाई, या फिर मामले को दबा दिया जाएगा?*

 

अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन अवैध बालू खनन पर कोई ठोस कदम उठाएगा, या फिर यह मामला भी दबा दिया जाएगा? टास्क फोर्स की निष्क्रियता और पुलिस प्रशासन की सुस्ती ने न केवल सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, बल्कि अवैध कारोबारियों को खुली छूट भी दे दी है। ऐसे में देखना होगा कि प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाता है या फिर यह मामला फाइलों में ही दबकर रह जाता है।

 

बहरहाल बालू का अवैध कारोबार न सिर्फ उक्त दोनों थाना क्षेत्र में बेरोकटोक जारी है बल्कि जिले के सभी प्रखंडों में धड़ल्ले से जारी है| मामले में समुचित कार्रवाई नहीं होने से ट्रैक्टरों के अलावा बड़े मालवाहक वाहनों से भी बालू की तस्करी की जा रही है| जिले के विभिन्न नदी घाटों से बालू का उठाव कर अन्य राज्यों में भेजा जा रहा है जिसपर कारवाई नहीं हो पा रही है|

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