*उपराजधानी के मसलिया प्रखंड की बेदियाचक-बसमत्ता सड़क बद से बद्तर,राहगीर व ग्रामीण परेशान*
*विभाग,प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाने के बावजूद आजादी काल से नहीं बनी सड़क*
*मसलिया(दुमका)*
*ब्यूरो रिपोर्ट*
केन्द्र एवं राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गंगा बहाने एवं गांवों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सड़कों का जाल बिछाने का चाहे कितना भी दावा क्यों न कर ले लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। जमीनी हकीकत विचलित कर देने वाली है। जी हां उपराजधानी के मसलिया प्रखंड का बेदियाचक बसमत्ता सड़क का हाल देखने के बाद यह लगेगा कि लोग आज भी अट्ठारहवीं सदी में जी रहे हैं।
लोग बरसात में इस रास्ते से फूंक फूंक कर कदम रखते हैं। सड़क के एक तरफ खाई तो दूसरी तरफ फिसल कर चोटिल होने का खतरा है। जहां राहगीर बमुश्किल से सड़क से पार हो पाते हैं। चार पहिया वाहनों का पार होना तो दूर दो पहिया वाहनों को पार करने के लिए चार लोगों को लगना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की लंबाई लगभग डेढ़ किलोमीटर के आस पास है जो बसमत्ता बैंक मोड़ से सीतपहाड़ी आश्रम सड़क तक है।
बीच में नयाडीह गांव पड़ता है जो बरसात के समय दो महीने तक टापू सा बन जाता है। ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क आजादी काल से नहीं बनी है। एक बार मिट्टी भराई का काम सालों पहले हुआ था जो बहकर कर पुनः सड़क गड्ढे में तब्दील हो गयी है। सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने कई बार संबंधित विभाग, नेता, मंत्री से लेकर स्थानीय जन प्रतिनिधियों तक गुहार लगायी हैं। लेकिन इस ओर ध्यान किसी ने नही दिया। ग्रामीणों का कहना है कि अगर पंचायत मद से दो-दो सौ मीटर की सड़क बनायी जाती तो यहां की समस्या दूर हो सकती थी लेकिन वह भी नहीं हो सका है।
*क्या कहते हैं राह में चलने वाले राहगीर व ग्रामीण*
सड़क की स्थिति बद से बदत्तर होते जा रही है, सड़क अब चलने लायक नहीं बची है। बीच सड़क गड्ढे नुमा बन गया है। सड़क का निर्माण बेहद जरूरी है। सरकार इस पर ध्यान दे- वंशीधर दास, बेदियाचक
सरकार मुख्य सड़क में सड़क के ऊपर सड़क निर्माण करा रही है, लेकिन ग्रामीण इलाके की सड़कों पर कोई ध्यान नहीं है। जिस कारण ग्रामीणों को काफी परेशानी हो रही है -रहमान अंसारी, बेदियाचक
गांव की अच्छी सड़कें ग्रामीण इलाकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होती क्योंकि इसी रास्ते से उनकी रोजी रोजगार तय होती है। सब्जी से लेकर तमाम समान रास्ते से लेकर जाना होता है -राबन सोरेन, बेदियाचक
विभिन्न दलों के नेता चुनाव के समय गांव पहुंचकर तमाम वादे करते है लेकिन, चुनाव हारने व जितने के बाद अपने सारे वादे भूल जाते हैं-भूटु राय, बेदियाचक।

