*इसरो को बड़ी उपलब्धि – पृथ्वी के वायुमंडल में फिर दाखिल हुआ इसरो के POEM-4 मॉड्यूल*
*नई दिल्ली*
*दीपक कुमार शर्मा*
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जानकारी दी है कि पीएसएलवी ऑर्बिटल प्लेटफॉर्म एक्सपेरीमेंट मॉड्यूल (पीओईएम-4) का चौथा संस्करण पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश कर गया है। पीओईएम-4 अंतरिक्ष ‘डॉकिंग’ प्रयोग मिशन के लिए उपयोग किए जाने वाले ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान का पुनरुद्देशित प्रयुक्त ऊपरी चरण है।
इसरो ने एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, अंततः पीओईएम-4 मॉड्यूल ने वायुमंडल में पुनः प्रवेश किया और चार अप्रैल 2025 को भारतीय समयानुसार पूर्वाह्न आठ बजकर तीन मिनट पर हिंद महासागर में टकराया। पीओईएम-4 को पृथ्वी के वायुमंडल में लाने की मुख्य वजह अंतरिक्ष मलबे की वृद्धि को रोकना है। इसरो के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है।
*अंतरिक्ष में बढ़ रहे मलवे को कम करने के उद्देश्य से इसे वापस पृथ्वी पर लाया गया*
30 दिसंबर 2024 को इसरो के पीएसएलवी- सी60 ने जुड़वां स्पेडेक उपग्रहों को प्रक्षेपित किया था और 475 किमी की ऊंचाई पर उपग्रहों को स्थापित करने के बाद पीएसएलवी सी 60 के विशेष रूप से तैयार किए गए ऊपरी चरण पीओईएम-4 को भी लगभग उसी कक्षा में रखा गया। अंतरिक्ष में बढ़ रहे मलवे को कम करने के उद्देश्य से इसे वापस पृथ्वी पर लाया गया।
इसके बाद, इसरो ने बताया कि पीओईएम-4 के इंजन को सक्रिय करके 55.2° झुकाव वाली लगभग 350 किमी की गोलाकार कक्षा में ले जाया गया। इसके बाद आकस्मिक टूट-फूट की किसी भी संभावित जोखिम को कम करने के लिए पीएस-4 को निष्क्रिय कर उसमें से ईधन बाहर निकाला गया।
*इस मिशन से मिली कई महत्वपूर्ण जानकारियां*
इसरो ने कहा कि अपने मिशन जीवनकाल के दौरान पीओईएम-4 ने कुल 24 पेलोड्स (14 इसरो के और 10 विभिन्न गैर सरकारी संस्थाओं के) को स्थान दिया था और सभी पेलोड्स ने अपेक्षित रूप से कार्य किया। जिससे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक डेटा प्राप्त हुआ।
