*अटल बिहारी वाजपाई जी के जन्मशताब्दी वर्ष पर भाजपा के प्रथम प्रदेश अध्यक्ष अभयकांत प्रसाद को किया गया सम्मानित*
*दुमका*
*ब्यूरो रिपोर्ट*
भाजपा के देशव्यापी कार्यक्रम भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपाई के जन्मशताब्दी वर्ष पर दुमका जिला की कार्यक्रम संयोजक डॉ. अंजुला मुर्मू के नेतृत्व में झारखंड भाजपा के प्रथम प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व राज्यसभा सांसद एवं पूर्व विधायक अभयकांत प्रसाद का सम्मान किया गया। इस अवसर पर उन्हें माला पहनाकर एवं अंगवस्त्र भेंट कर अभिनंदन किया गया।
अवसर पर श्रद्धेय अटल जी को याद करते हुए अभयकांत प्रसाद ने कहा कि वर्ष 1985 में जब वे विधानसभा चुनाव लड़ रहे थे, तब अटल बिहारी वाजपेयी जी उनके चुनाव प्रचार के लिए सारवां आए थे और उन्होंने उस विधानसभा में जीत हासिल की थी।
उन्होंने बताया कि एकीकृत बिहार भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की एक महत्वपूर्ण दो दिवसीय बैठक बासुकिनाथ में आयोजित हुई थी, जिसका उद्घाटन स्वयं अटल जी ने किया था।
अभयकांत प्रसाद ने स्मरण करते हुए कहा कि अटल जी धनबाद से सड़क मार्ग द्वारा बासुकिनाथ पहुंचे और फिर बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर जाकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान मंदिर के द्वार खुलने में विलंब हुआ, तो अटल जी धैर्यपूर्वक वहीं बैठकर मंदिर का द्वार खुलने की प्रतीक्षा करने लगे।
पूजा के दौरान एक पंडा (पुरोहित) ने मजाकिया लहजे में अटल जी से पूछा, हुजूर का घर और स्थायी निवास कहां है? इस पर अटल जी ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया कि सारा हिंदुस्तान मेरा घर है और स्थायी निवास रेल का डब्बा।
अभयकांत प्रसाद ने बताया कि अटल जी का यह उत्तर उनकी विराट सोच, राष्ट्रभक्ति और निरंतर जनता से जुड़े रहने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वे उन दिनों पार्टी संगठन के विस्तार के लिए देशभर में प्रवास कर रहे थे, जिसके कारण रेलगाड़ी ही उनका स्थायी निवास बन गई थी।
उन्होंने स्मरण करते हुए कहा कि बासुकिनाथ में कवि सम्मेलन हुआ था, उस कवि सम्मेलन में बड़े-बड़े कवि के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेतागण पहुंचे थे। कवि सम्मेलन में किसी ने कविता में अटल जी से पूछ लिया कि चुनाव कैसे हार गए तब अटल जी ने कविता के माध्यम से कहा “क्या हार में क्या जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं, संघर्ष पथ पर जो मिले, यह भी सही वह भी सही”।
श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी केवल एक नाम नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति में आदर्श नेतृत्व, उत्कृष्ट कला और अडिग राष्ट्रभक्ति का प्रतीक थे। वे एक ओजस्वी वक्ता, प्रखर विचारक, कुशल प्रशासक और संवेदनशील कवि थे। उनकी वाणी में समर्पण, सोच में दूरदर्शिता और कार्यशैली में दृढ़ संकल्प झलकता था। “सरकार बनेगी, गिरेगी, फिर बनेगी, लेकिन देश का लोकतंत्र जीवित रहना चाहिए” जैसे उनके विचार उनकी लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष गौरवकांत, बासुकिनाथ मंडल अध्यक्ष शैलेश राव, जिला मीडिया सह प्रभारी नवल किस्कू, युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष पप्पू कुमार सिंह, सुमित नायक आदि उपस्थित थे ।
