*उद्यान विकास योजना अंतर्गत आयोजित मशरूम प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न*
*98 पहाड़िया कृषक सहित कुल 168 किसानों को दिया गया मशरूम की खेती का प्रशिक्षण*
*मशरूम प्रशिक्षण कार्यक्रम ने न केवल किसानों को नई संभावनाएँ दी बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता की राह पर भी अग्रसर किया*
*साहेबगंज*
*ब्यूरो रिपोर्ट*
उद्यान विकास योजना अंतर्गत आयोजित मशरूम प्रशिक्षण कार्यक्रम का सोमवार को सफल समापन हुआ। इस योजना के तहत कुल 168 किसानों, जिनमें 98 पहाड़िया कृषक और जेएसएलपीएस (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी) द्वारा चयनित सखी मंडल की महिलाएँ शामिल थीं, को मशरूम की खेती का प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम के अंत में पतना प्रखंड के बड़ा दिग्घी पंचायत में किसानों के बीच मशरूम कीट का वितरण किया गया।
संयुक्त रूप से मशरूम कीट वितरण का कार्य सहायक निदेशक उद्यान, दुमका दयानंद प्रसाद एवं जिला उद्यान पदाधिकारी, साहिबगंज अमितेश रंजन द्वारा किया गया।
इस दौरान दयानंद प्रसाद ने बताया कि बहुत ही कम लागत में किसान मशरूम की खेती कर अपनी आजीविका के साधनों को सशक्त बना सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मशरूम उत्पादन के लिए भूमि की आवश्यकता नहीं होती, जिससे छोटे किसानों को भी इसका सीधा लाभ मिल सकता है।
*मशरूम: कम लागत में अधिक मुनाफे की खेती*
मशरूम पोषण से भरपूर एक ऐसी फसल है जो किसानों को आर्थिक मजबूती प्रदान कर सकती है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पदाधिकारियों ने किसानों को बताया कि मशरूम में प्रोटीन और विटामिन की प्रचुरता होती है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। यह खेती घर के एक छोटे से कोने में भी की जा सकती है, जिससे न्यूनतम संसाधनों में अधिकतम लाभ कमाया जा सकता है। इस प्रशिक्षण को जिले के पाँच प्रखंडों – पतना, बरहेट, बोरियो, तालझारी और मंडरो में आयोजित किया गया। खासतौर पर पहाड़िया कृषकों के बीच इस प्रशिक्षण को लेकर बहुत उत्साह देखा गया। किसानों ने मशरूम की खेती के बारे में बारीकी से जानकारी प्राप्त की और इसे अपने जीवनयापन के लिए उपयोग करने की प्रतिबद्धता जताई।
*सखी मंडल की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल*
जेएसएलपीएस द्वारा चयनित सखी मंडल की महिलाओं को भी इस प्रशिक्षण में शामिल किया गया, जिससे वे भी मशरूम की खेती को अपनाकर आत्मनिर्भर बन सकें। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के नए अवसर प्रदान करना है। उद्यान विभाग एवं जेएसएलपीएस के अधिकारियों ने बताया कि महिलाएँ इस खेती को अपने घरों में आसानी से कर सकती हैं और अतिरिक्त आय अर्जित कर सकती हैं।
इस प्रशिक्षण सह वितरण कार्यक्रम में उद्यान विभाग से प्रेम पासवान, जेएसएलपीएस से घनश्याम कुमार, प्रवेश जी, राजकुमार जी, सखी मंडल की महिलाएँ और अन्य कृषक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान किसानों को मशरूम उत्पादन की तकनीकी जानकारी, विपणन रणनीति और इसके पोषण मूल्य के बारे में विस्तार से बताया गया।
मशरूम प्रशिक्षण कार्यक्रम ने न केवल किसानों को नई संभावनाएँ दी हैं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता की राह पर भी अग्रसर किया है। पहाड़िया किसानों और ग्रामीण महिलाओं को यह नई खेती अब एक मजबूत आर्थिक आधार देने का काम करेगी।
