*जंतर-मंतर पर जनता की अदालत में पहुंचे अरविंद केजरीवाल,बोले- मेरे खिलाफ षड्यंत्र रचा गया,मैं गलत करने नहीं आया*

*नई दिल्ली*
*ब्यूरो रिपोर्ट*
दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद आज अरविंद केजरीवाल जंतर-मंतर पर जनता की अदालत में पहुंचे हैं। अरविंद केजरीवाल ने जनता की अदालत को संबोधित किया। जनता की अदालत में आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल अपनी बात रखी। केजरीवाल ने इस्तीफा देते हुए कहा था कि वो जनता की अदालत में जाएंगे। केजरीवाल ने कहा था कि वे सीएम की कुर्सी पर तभी बैठेंगे जब जनता उन्हें ईमानदारी का प्रमाणपत्र देगी।
जनता की अदालत में दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिश, कैबिनेट मंत्री सौरभ भारद्वाज, संगठन मंत्री संदीप पाठक, विधानसभा उपाध्यक्ष राखी बिड़ला, मनीष सिसोदिया, विधायक दुर्गेश पाठक, दिलीप पांडे भी पहुंचे हैं। जनता को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मेरे खिलाफ षड्यंत्र रचा गया। मेरे नेताओं को जेल भेजा गया। मैं देश बदलने के लिए आया हूं, मैं कुछ गलत करने नहीं आया। हमे चुनौती दी गई। चुनाव लड़ लो। 2013 में ईमानदारी से चुनाव लड़ें। लोग कह रहे थे। उनकी जमानत जब्त होगी। लेकिन पहली बार में ही सरकार बना दिया। सरकार बनने के बाद दिल्ली में बिजली, पानी, बस यात्रा फ्री, बच्चो की शिक्ष सब को फ्री कर दिया। भाजपा को लगा कि अरविंद केजरीवाल को भ्रष्टाचारी घोषित कर दो। उन्होंने हमारे पार्टी के बड़े नेता को जेल में डाल दिया। जैसे ही नवरात्र आएंगे मैं घर छोड़ दूंगा। आप में से किसी के घर ही आ कर रहूंगा।
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मुझे सबसे कठिन कानून PMLA एक्ट के तहत फंसाया। लोगों ने बताया कि यह बहुत लंबा चलेगा। तब मैंने यह सोचा कि मैं जनता की अदालत में जाऊंगा। मैं भ्रष्टाचार के दाग के साथ जी ही नहीं सकता। मैं दिल्ली की जनता से पूछना चाहता हूं कि अगर मैं बेईमान होता तो क्या मैं दिल्ली में बिजली फ्री कर पाता। बिजली फ्री करने के लिए 3000 करोड़ रुपये लगते हैं। अगर मैं बेईमान होता तो क्या पानी फ्री कर पाता, क्या अच्छे स्कूल दिल्ली में बन पाते। मैं भ्रष्टाचारी होता तो सारे पैसे खा जाता। आने वाले चुनाव एक अग्नि परीक्षा है। अगर आपको लगता है कि केजरीवाल ईमानदार है तो केजरीवाल को वोट देना। उन्होंने कहा कि भाजपा के किसी भी सरकार में कहीं पर भी बिजली फ्री नहीं है तो फिर आप बताइए कि चोर कौन हैं। क्या केजरीवाल चोर है या केजरीवाल को जेल भेजने वाले चोर हैं। आरएसएस के प्रमुख से पांच सवाल पूछना चाहता हूं।
*केजरीवाल ने आरएसएस से पूछे पांच सवाल*
1-जिस तरह पीएम मोदी देश भर में लालच देकर या ईडी-सीबीआई का डर दिखाकर दूसरी पार्टी के नेताओं को तोड़ रहे हैं, सरकारें गिरा रहे हैं- क्या ये देश के लोकतंत्र के लिए सही है? क्या आप नहीं मानते ये भारतीय जनतंत्र के लिए हानिकारक है?
2-देश भर में सबसे ज्यादा भ्रष्ट्राचारी नेताओं को मोदी ने अपनी पार्टी में शामिल करवाया। जिन नेताओं को कुछ दिन पहले उन्होंने खुद सबसे भ्रष्ट्राचारी बोला। जिन नेताओं को अमित शाह ने भ्रष्ट्राचारी बोला। कुछ दिन बाद उन्हें भाजपा में शामिल करवा लिया? क्या आपने ऐसी भाजपा की कल्पना की थी? क्या इस प्रकार की राजनीति पर आपकी सहमति है?
3- भाजपा आरएसएस की कोख से पैदा हुई है। कहा जाता है कि ये देखना आरएसएस की जिम्मेदारी है कि भाजपा पथभ्रष्ट न हो। क्या आप आज की भाजपा के कदमों से सहमत हैं। क्या आपने कभी पीएम मोदी से ये सब न करने के लिए कहा ?
4- जेपी नड्डा ने चुनाव के दौरान कहा कि भाजपा को आरएसएस की जरूरत नहीं है। आरएसएस भाजपा की मां समान है। क्या बेटा इतना बड़ा हो गया है कि मां को आंखें दिखाने लगा है? जिस बेटे को पालपोष के बड़ा किया ,प्रधानमंत्री बनाया, आज वो अपनी मातातुल्य संस्था को आंखें दिखा रहा है। जब जेपी नड्डा ने ये कहा तो आपको दुख नहीं हुआ ? क्या आरएसएस के हर कार्यकर्ता को दुख नहीं हुआ?
5- आरएसएस भाजपा ने मिलकर ये कानून बनाया था कि 75 वर्ष का होने पर किसी भी व्यक्ति को रिटायर होना पड़ेगा। इस कानून के तहत आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे बहुत बड़े नेताओं को भी रिटायर कर दिया गया। अब अमित शाह कह रहे हैं कि वो नियम पीएम मोदी पर लागू नहीं होगा। क्या आप इससे सहमत हैं कि जो नियम आडवाणी पर लागू हुआ वो पीएम मोदी पर लागू नहीं होगा|
सभा को मंत्री गौपाल राय एवं मनीष सिसोदिया समेत अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया|
