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शिकारीपाड़ा में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश का कोई असर नहीं, खुलेआम जारी है बालू का उठाव व परिवहन* 

*शिकारीपाड़ा में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश का कोई असर नहीं, खुलेआम जारी है बालू का उठाव व परिवहन*

 

*बालू का अवैध परिवहन करते पकड़े गए ट्रैक्टर को बालू गिरवाकर छोड़ देना बना चर्चा का विषय*

 

*शिकारीपाड़ा(दुमका)*

 

*शिकारीपाड़ा ब्यूरो की रिपोर्ट*

 

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से दस जून से पंद्रह अक्टूबर तक नदी तलों से बालू के उठाव एवं परिवहन पर लगायी गई है, परन्तु एनजीटी के बालू उत्खनन पर रोक का असर शिकारीपाड़ा अंचल में नहीं दिखाई दे रहा है| दुमका के शिकारीपाड़ा प्रखंड में खुलेआम बालू का उठाव एवं परिवहन जारी है। मंगलवार को बालू के अवैध उत्खनन एवं परिवहन के नाम पर संबंधित अधिकारी की अजीबोगरीब करवाई देखने को मिली। मंगलवार की सुबह बालू का अवैध परिवहन करते हुए अंचल अधिकारी कपिल देव ठाकुर ने एक ट्रैक्टर को पकड़ा तथा उसे प्रखंड परिसर में लाकर खड़ा किया।

मामले में कुछ देर बाद ही एक अनूठी कारवाई की गई जिसकी शिकारीपाड़ा के साथ साथ पूरे जिले में चर्चा हो रही है| अधिकारी ने बालू को प्रखंड कार्यालय के सामने गिरवाकर ट्रैक्टर को छोड़ दिया, जिसका प्रमाण प्रखंड कार्यालय में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे से सहजता से मिल सकता है। सूत्रों की मानें तो किसी रसूखदार नेता के कहने पर बालू सहित पकड़े गए ट्रैक्टर को बालू गिरवाकर छोड़ दिया गया।

इस संबंध में काफी प्रयास के बावजूद भी अंचल अधिकारी ने कुछ भी नहीं बताया। बहरहाल अब मामले में ऐसा क्यों किया गया यह बताना थोड़ा मुश्किल है परन्तु निर्धारित नियम के अनुसार अवैध रूप से बालू का उत्खनन व परिवहन कर रहे ट्रैक्टर को जब्त कर फिर बालू गिरवाकर ट्रैक्टर को छोड़ देना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं कहा जा सकता, पूरे जिले में घटना की चर्चा हो रही है कि ऐसा करना न्याय संगत है या कुछ और बात है| बहरहाल मामले में ऐसा क्यों किया गया इसकी जानकारी तो संबंधित पदाधिकारी ही दे सकते है।

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