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शारदीय नवरात्र के समापन के साथ दशमी तिथि को पूरे देश में धूमधाम से मनाया गया दशहरा पर्व* 

*शारदीय नवरात्र के समापन के साथ दशमी तिथि को पूरे देश में धूमधाम से मनाया गया दशहरा पर्व*

 

*फतेहपुर(जामताड़ा)*

 

शारदीय नवरात्र के समापन के पश्चात दशमी तिथि को सम्पूर्ण भारत में समर्पित व भक्ति श्रद्धा भाव से दशहरा पर्व मनाया गया। फतेहपुर प्रखण्ड मे भी उसी अनुरूप दशहरा पर्व मनाया गया| वैदिक विधान के अनुरूप यह पर्व प्रत्येक वर्ष शारदीय नवरात्रि के समापन के साथ दशमी तिथि को दशहरा तथा विजयादशमी के रूप मे मनाया जाता है। इस दिन अत्याचारी दुराचारी अनुशासन एवं विघटन व दमनकारी रावण

का अंत हुआ था| मूलरूप से असत्य पर सत्य की विजय हुई थी। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने श्रीमुख से गीता में कहा है कि जब जब पृथ्वी पर असामाजिक तत्व,दुराचारी परमसीमा पर पहुँच जायेगा उस समय सामाजिक समरसता व अनुशासित जीवन शैली को पुनर्स्थापित करने के लिए विभिन्न अवतार के रूप में महापुरुष जन्म लेंगे या देवताओ को अधिकृत करेंगे।दूर्गा के रूप मे महिषासुर का वद्ध, राम के रूप मे रावण का अंत करना ये सभी लीला में से है। दूर्गा पूजा के अंत मे ही 10दिन तक चलने वाले युद्ध मे मां दूर्गा ने महिषासुर का इसी दिन वद्ध किया था।

राम ने इसी दिन रावण का अंत करके लंका पर विजय प्राप्त की थी| किसी शुभ कार्य को करने के पहले देव देवी देवतुल्य परिजनो को शिर झुकाने की परम्परा वैदिक विधिविधान पर आधारित है। इसलिए दुर्गा पूजा के अंत मे विजया दशमी को गुरुजन व बड़ो को प्रणाम किया जाता है और इस प्रणाम से आशिष मिलता है। अनुशासित प्रणाम शष्टांग प्रणाम है अर्ध शष्टांग की प्रचलन से क्वार्टर प्रणाम की प्रचलन में आकर सिमट गया है। आज के आधुनिक युग मे प्रणाम की प्रक्रिया समाप्त होती जा रही है|

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