*लकड़ी माफियाओं के लिए सेफ जोन बनता जा रहा है जामताड़ा का फतेहपुर अंचल क्षेत्र*
*वन विभाग की उदासीनता से दिन के उजाले में की जा रही है पेड़ों की कटाई व तस्करी*
*फतेहपुर(जामताड़ा)*
जामताड़ा जिले का फतेहपुर अंचल क्षेत्र लकड़ी माफियाओं के लिए सेफ जोन बनता जा रहा है। दरअसल सीमावर्ती पश्चिम बंगाल के राजनगर क्षेत्र के लकड़ी माफिया और सीमावर्ती दुमका जिले के टोंगरा थाना क्षेत्र के कतिपय लकड़ी माफियाओं द्वारा फतेहपुर अंचल क्षेत्र के विभिन्न गांवों से हरे-भरे पेड़ों को गैर कानूनी तरीके से काटने का सिलसिला जारी है।
शनिवार को भी फतेहपुर थाना क्षेत्र के बाघमारा गांव में कई पेड़ों को माफियाओं द्वारा काटा जा रहा था। लेकिन जब वहां गुप्त सूचना पर कई समाचार पत्रों के संवाददाता पहुंचे तो लकड़ी माफिया फरार हो गए। दो बड़े-बड़े पेड़ का नीचे का हिस्सा थोड़ा सा ही काटा जा चुका था । वही एक सप्ताह के अंदर दर्जनों बड़े-बड़े पेड़ों को माफिया काटकर राजनगर ले गए है। सबसे बड़ी बात यह है कि फतेहपुर कुंडहित मुख्य मार्ग के किनारे हजारों की संख्या में हरे भरे पेड़ हैं।
जहां अक्सर लकड़ी माफियाओं की नजर रहती है। ये लोग भोले भाले लोगों को अपने जाल में फंसाकर गैर कानूनी तरीके से लकड़ी काटकर ले जाते हैं। इधर बाघमारा गांव स्थित सोनाझुड़ी जंगल में दर्जनों काटे गए पेड़ पूर्व में सरकार की ओर से लगाए गए थे। ऐसे में कहा जा सकता है कि लकड़ी माफियाओं का अब इतना मनोबल बढ़ गया है कि वे लोग दिन के उजाले में भी इस काम को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे में साफ तौर पर जाहिर है कि वन विभाग ऐसे लकड़ी माफियाओं पर अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रहा है।
इस संबन्ध में जब वनरक्षी विजय कुमार से फ़ोन पर बात हुई तो उन्होंने बताया कि आज मैं एग्जाम ड्यूटी में हूँ मुझे इस संबन्ध में जानकारी नहीं है|
