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झामुमो के गढ़ जामा विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार सुरेश मुर्मू की झामुमो से सीधी टक्कर* 

*झामुमो के गढ़ जामा विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार सुरेश मुर्मू की झामुमो से सीधी टक्कर*

 

*अपनी पारंम्परिक सीट बचाने में सफल होगा झामुमो या भाजपा प्रत्याशी सुरेश मुर्मू की होगी जीत*

 

*भाजपा नेत्री डॉ लुईस मरांडी ने दिया पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र,अब से कुछ देर बाद झामुमो में होंगी शामिल*

 

*जामा(दुमका)*

 

*जामा ब्यूरो की रिपोर्ट*

 

भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव के लिए पहली सूची जारी कर दी है| जामा विधानसभा सीट पर भाजपा ने पुराने चेहरे पर भरोसा करते हुए सुरेश मुर्म को तीसरी बार उम्मीदवार बनाया है| जिससे सुरेश मुर्म का खेमा खुश हो गया है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी द्वारा टिकट बंटवारे की घोषणा करते ही जामा की राजनीति गरमा गई है।

टिकट पाने की आस लगाए भाजपा नेता सह समाजिक कार्यकर्ता राजू पुजहर ने रविवार को पाला बदल कर जेकेएलएम जिला कार्यालय में जिलाध्यक्ष निरंजन मुर्मू और जिला सचिव हेंमत कुमार दास के समक्ष सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JKLM) की सदस्यता ग्रहण कर ली। सूत्रों की मानें तो राजू पूजहर जामा विधानसभा से जेकेएलएम से प्रत्याशी हो सकते हैं।

अगर राजू पुजहर जामा विधान सभा सीट से चुनाव लड़ते है तो इसका मतलब यह है कि पहाड़िया वोट में सेंधमारी होना तय है जो भाजपा का पारंपरिक वोटर माना जाता है, वह खिसक सकता है और इसका फायदा जेएमएम को हो सकता है। सूत्रों ने बताया कि करीब ग्यारह-बारह हजार पहाड़िया वोट भाजपा को मिलता है जो हाथ से निकल सकता है।

हालांकि झामुमो ने अभी तक जामा सीट पर अपना पत्ता नहीं खोला है, लेकिन भाजपा नेत्री डॉ लुईस मरांडी के पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद यह कयास लगाया जा रहा है कि वो जामा से झारखंड मुक्ति मोर्चा की प्रत्याशी हो सकती है। पूर्व मंत्री सह भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ लुइस मरांडी को दुमका विधानसभा सीट के लिए भाजपा का प्रबल दावेदार माना जा रहा था और वो दुमका सीट पर चुनाव लड़ना चाहती थी| उनकी क्षेत्र में पकड़ भी रही है, लेकिन सुनील सोरेन को टिकट देने की घोषणा से डॉ लुईस मरांडी काफी नाराज हैं और अपना भविष्य सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने भाजपा छोड़ दिया है|

बताते चलें कि डॉ लुईस मारंडी भाजपा का दामन छोड़ अब से कुछ देर बाद झामुमो में शामिल हो सकती है। डॉ लुइस मरांडी के नजदीकी कार्यकर्ताओं ने बताया कि वे झामुमो के संपर्क में है और हेमंत सोरेन से मुलाकात कर अपनी राय दे चुकी हैं। यह खबर भी क्षण कर आ रही है कि जामा विधानसभा सीट से डॉ लुईस मरांडी झामुमो उम्मीदवार हो सकती है। गौरतलब है कि जामा सीट झामुमो की पारंपरिक सीट मानी जाती है| इसे झामुमो का गढ़ माना जाता है जिसे झामुमो अपने सुरक्षित सीट मानती है|

ऐसे में सोरेन परिवार अपने परिवार से बाहर जाकर टिकट देता है या नहीं यह देखना दिलचस्प होगा। उड़ती खबर यह भी है कि बसंत सोरेन ने दुमका के अलावा जामा विधानसभा सीट से भी चुनाव लड़ने का मन बनाया है। नतीजों पर गौर करें तो 1980 से 2019 तक जामा सीट पर सिर्फ एक बार छोड़कर झामुमो का कब्जा है| केवल 2005 में सुनील सोरेन ने दुर्गा सोरेन को हराकर भाजपा को जीत दिलाई थी, लेकिन दुर्गा सोरेन के निधन के बाद 2009 से लगातार तीन बार सीता सोरेन ने भाजपा उम्मीदवार सुरेश मुर्म को शिकस्त देकर झामुमो का परचम लहराया था। ऐसे में झामुमो का अगला कदम क्या होगा यह देखना दिलचस्प होगा।

वर्तमान समय में समीकरण बदला हुआ है| सीता सोरेन को घर में मान सम्मान नहीं मिलने से वे अपने घर से बाहर निकल कर भाजपा में शामिल हो गई है और 2024 लोकसभा चुनाव में दुमका लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ चुकी है। सीता सोरेन कई कारणों से जीत हासिल नहीं कर पाई परन्तु वो अपनी बेटी जयश्री को जामा विधान सभा सीट से चुनाव लड़ाना चाहती थी, लेकिन अब सुरेश मुर्म को टिकट दिए जाने से जयश्री को अभी कुछ समय इंतजात करना पड़ेगा। सुरेश मुर्म को टिकट दिए जाने से जामा विधानसभा सीट की राजनीति गरमा गई है और राजनीति गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं|

बहरहाल राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है, आगे देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा अपने नाराज नेताओं को कैसे मनाती हैं और झामुमो अपनी पारंम्परिक सीट पर किसे उम्मीदवार बनाता है। वैसे डॉ लुईस मरांडी के भाजपा से इस्तीफा देने के बाद व झामुमो में शामिल होने की पुख्ता जानकारी के बाद यह तय माना जा रहा है कि वो जामा विधानसभा सीट से झारखंड मुक्ति मोर्चा की उम्मीदवार हो सकती है|

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