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आम लोगों के मामलों को तरजीह देगा सुप्रीम कोर्ट, CJI सूर्यकांत ने दिए निर्देश, शेड्यूल जारी* 

*आम लोगों के मामलों को तरजीह देगा सुप्रीम कोर्ट, CJI सूर्यकांत ने दिए निर्देश, शेड्यूल जारी*

 

*नई दिल्ली*

 

आम लोगों की परेशानियों और स्वतंत्रता से जुड़े मामलों को अब सुप्रीम कोर्ट में प्राथमिकता से सुना जाएगा| मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के निर्देश पर सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू करते हुए कहा है कि जहां आम जनता की स्वतंत्रता का प्रश्न हो या तुरंत अंतरिम राहत की मांग की गई हो, ऐसे केसों को सत्यापन और त्रुटि निवारण के बाद दो कार्यदिवस के भीतर मुख्य या पूरक सूची में शामिल किया जाएगा|

 

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमित जमानत, अग्रिम जमानत और जमानत रद्द करने से जुड़े सभी मामलों की प्रति भारत सरकार, राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश के संबंधित नोडल अधिकारी या स्थायी वकील को अनिवार्य रूप से भेजनी होगी| इन मामलों में एक अलग आवेदन दाखिल करना होगा, जिसके बिना न तो केस सत्यापित होगा और न ही कोर्ट की सूची में रखा जाएगा| सुप्रीम कोर्ट की इस पहल का उद्देश्य आम जनता के हित से जुड़े मामलों की सुनवाई को तेज और सुगम बनाना है|

 

*सुप्रीम कोर्ट ने सूचीबद्धता को लेकर शेड्यूल किया जारी*

 

सुप्रीम कोर्ट ने नए मामलों की सूचीबद्धता को लेकर भी एक तय शेड्यूल जारी किया है| अब मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को सत्यापित हुए मामले अगले सोमवार को सूचीबद्ध होंगे| शुक्रवार, शनिवार और सोमवार को सत्यापित हुए मामले अगले शुक्रवार को रखे जाएंगे| नई व्यवस्था के तहत नए केस अपने आप सूची में आ जाएंगे और अब तक की तरह वादियों को कोर्ट में अपने मामलों का मेंशन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी|सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि उपरोक्त श्रेणी के मामलों में कोई भी उल्लेख स्वीकार नहीं किया जाएगा|

 

*सुप्रीम कोर्ट की दहेज प्रथा पर भी कड़ी टिप्पणी*

 

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने दहेज प्रथा को लेकर भी बेहद कड़ी टिप्पणी की है| एससी ने कहा कि जिस विवाह को भारतीय समाज में जीवन का सबसे पवित्र बंधन माना जाता था वह आज दहेज की वजह व्यावसायिक सौदे में बदल गया है| कोर्ट ने कहा कि आधुनिक समय में लोग विवाह उपहारों, पैसों और दिखावे के साथ जोड़ देते हैं, जिससे इस रिश्ते की आत्मा ही कमजोर हो रही है| दहेज को चालाकी से उपहार या परंपरा बताने की कोशिश की जाती है, लेकिन वास्तव में ये एक लालच का रूप ले चुका है|

 

*सुप्रीम कोर्ट की अपील*

 

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि विवाह प्रेम, विश्वास और समानता पर आधारित होना चाहिए| अदालत ने देश के युवाओं, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि वे मिलकर दहेज के खिलाफ माहौल तैयार करें| इसके बिना न तो दहेज हत्या रुकेंगी, न महिलाओं पर अत्याचार कम होगा|कोर्ट ने स्पष्ट संदेश दिया है कि दहेज तभी खत्म होगा, जब हम इसे रिवाज नहीं बल्कि बुराई समझकर खुले मन से इसका विरोध करेंगे|

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